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अंधेरों में चलना सीख लो।


मेरे द्वारा लिखी गई कविता मेरे अंतर्मन को छूती है इसीलिए मैंने सोचा कि मैं उसको आपके साथ भी शेयर करूं

Written by- Ravidas Titoriya

The Glorious Poem-
अंधेरों में चलना सीख लो।


ऐ मुसाफिर तू जरा अंधेरों में चलना सीख ले

बेशक मंजिल उजालों में मिलेगी पर

राहे सफर अंधियारा ही होगा ।


माना तू सत्ता सामान लिए, माना बड़ा आराम लिए

अरे अभिमान के खटोला पर बैठा

अहंकार की सेज लिए,जीवन को जीना सीख ले ,

बेशक सुबह उजाला सूरज का होगा

पर रात अंधियारी ही होगी।


ए मधुबन के पुष्प सरोज जग सुगंध करना सीख ले

बेशक तू खिला भोर में

पर ऊर्जा रात अंधेरों की होगी।


ऐ मुसाफिर तू जरा अंधेरों में चलना सीख ले

बेशक मंजिल उजालों में मिलेगी पर

राहे सफर अंधियारा ही होगा।। 


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