रात दिन चिंता खाए रही,
यह जालिम जमाना और
महंगाई हम सबको रुलाए रही ।
बेरोजगारी का बोझ सारा
अपने सर लिए घूम रहे,
और यह सरकारें फ्री के वोट खाए रही ।
विल पावर जगा जगा कर
खुद भी शर्म आए रही,
रिवीजन की मार दिमाग पर
अच्छी निंदिया लाए रही ।
ग्रेजुएशन कंप्लीट हुआ 19 में
और 2 साल से लोकडाउन में,
घर पर प्याज उगाए रहे ।
अब फिर से जग रहे हैं तैयारी के लिए
तब तक आधा ज्ञान भलाए रहे ।
देखते हैं करते हैं फिर से प्रयास
एक चांस मानकर भविष्य की योजना बनाए रहे ।

2 Comments
Amazing 👌👌👌
ReplyDeleteThankyou bhai
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